Pavkarayata Galgesima सिंहली उपन्यासकार, आलोचक और निबंधकार मार्टिन विक्रमसिंघे (Martin Wickramasinghe, 1890-1976) का एक कहानी-संग्रह है, जिन्हें प्रायः आधुनिक सिंहली साहित्य का जनक कहा जाता है। यह पहली बार 1936 में प्रकाशित हुआ, और अंग्रेज़ी में इसके शीर्षक का अनुवाद सामान्यतः Stoning the Sinner (पापी पर पत्थर बरसाना) किया जाता है। यह सिंहली भाषा का संस्करण है। शीर्षक को Pavkarayata Gal Gaseema या Pawkarayata Gal Geseema भी लिखा जाता है।
यह पुस्तक उनके सबसे प्रसिद्ध उपन्यास Gamperaliya (1944) से पहले के दशक में आई, और यह उनके आरंभिक संग्रहों Geheniyak (1924) और Magul Gedara (1927) तथा बाद के Handa Sakki Kima (1945) और Vahallu (1951) के बीच आती है।
शीर्षक उस विचार की ओर संकेत करता है जो पूरी पुस्तक में व्याप्त है। जैसा कि डेली मिरर ने संक्षेप में कहा है, विक्रमसिंघे सुझाते हैं कि हमें पापी के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए और अपनी आलोचना व्यक्ति के बजाय पाप पर केंद्रित करनी चाहिए। भूमिका में, जिसे राजनीति विज्ञानी जयदेव उयनगोड ने उद्धृत किया है, वे मनुष्य की दुष्टता और अच्छाई दोनों को एक प्रकार की सहानुभूतिपूर्ण तटस्थता से देखने की बात करते हैं। उयनगोड इस संग्रह को विक्रमसिंघे के लेखन में आए उस बदलाव के भीतर रखते हैं, जिसमें वे खुले तौर पर उपदेशात्मक कथा-साहित्य से हटकर लोगों के चित्रण के एक कोमल, अधिक सहानुभूतिपूर्ण तरीके की ओर बढ़े।
प्रकाशक का विवरण इसे एक मनोरंजक संग्रह के रूप में प्रस्तुत करता है जो रोज़मर्रा के जीवन की विडंबनापूर्ण और हास्यपूर्ण स्थितियों को चित्रित करता है। यह पुस्तक उन सिंहली पाठकों के लिए उपयुक्त है जो चुटीली, मानवीय दृष्टि वाली लघु कथाएँ पसंद करते हैं, और उन विद्यार्थियों के लिए जो उनके आरंभिक उपन्यासों और 1940 के दशक की प्रमुख कृतियों के बीच एक लेखक के रूप में विक्रमसिंघे के विकास का अध्ययन कर रहे हैं।
- लेखक: Martin Wickramasinghe
- प्रकाशन वर्ष: 1936
- भाषा: सिंहली



