Geheniyak (जिसे Gahaniyak भी लिखा जाता है) मार्टिन विक्रमसिंघे (Martin Wickramasinghe, 1890-1976) का एक कहानी-संग्रह है, जो पहली बार 1924 में प्रकाशित हुआ। यह सिंहली भाषा का संस्करण है। शीर्षक का अर्थ है एक स्त्री। यह विक्रमसिंघे की पहली कहानी-पुस्तक थी, जिसे उन्होंने चार उपन्यास प्रकाशित करने के बाद लिखा था, और मार्टिन विक्रमसिंघे ट्रस्ट इसे श्रीलंका में प्रकाशित अपनी तरह का पहला संग्रह बताता है।
पहली बार संकलित रूप में ये कहानियाँ अधिकतर औपनिवेशिक शासन के अधीन दक्षिणी प्रांत के अर्ध-कृषक गाँवों में घटित होती हैं, और उनमें से एक कोलंबो की झुग्गियों तक जाती है। इनमें "Begal" शामिल है, जो गाँव के गप्पी किस्सागो आंडो अइया के बारे में है, जो एक चाय की दुकान के ग्राहकों का मनोरंजन करता रहता है; "Irunu Kabaaya" ("फटी जैकेट"), जो गाँव वालों की कमज़ोरियों को उपहास के बजाय करुणा से देखती है; और "Kuvenihaamy", एक ग़रीब ग्रामीण स्त्री की कहानी, जो कोलंबो में घरेलू नौकरी करने जाती है, गर्भवती होने पर छोड़ दी जाती है और शोषणकारी संबंधों की एक श्रृंखला से गुज़रती है, जिसके परिणाम दुखद होते हैं।
इस संग्रह पर लिखे एक शताब्दी-निबंध में राजनीति विज्ञानी जयदेव उयनगोड इसे एक लेखक के रूप में विक्रमसिंघे के विकास का निर्णायक मोड़ बताते हैं: उनके पहले उपन्यास Leela की खुली तर्कप्रधान शैली से हटकर ग़रीबों और हाशिये पर पड़े लोगों के प्रति सहानुभूति पर आधारित एक शांत कथा-शैली की ओर कदम। साधारण लोगों के प्रति, और विशेषकर समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़ी स्त्रियों के प्रति यह सहानुभूति उनकी बाद की अधिकांश रचनाओं में दिखाई देती है।
यह उन पाठकों के लिए उपयुक्त है जो आधुनिक सिंहली कहानी की शुरुआत और विक्रमसिंघे के आरंभिक कथा-साहित्य में रुचि रखते हैं।
- लेखक: Martin Wickramasinghe
- प्रकाशन वर्ष: 1924
- भाषा: सिंहली


