Karuvala Gedara (जिसे Karuwala Gedara भी लिखा जाता है) मार्टिन विक्रमसिंघे (Martin Wickramasinghe, 1890-1976) का एक उपन्यास है, जिन्हें प्रायः आधुनिक सिंहली साहित्य का जनक कहा जाता है। इसका प्रकाशन वर्ष सामान्यतः 1963 माना जाता है, और यह सिंहली भाषा का संस्करण है। अंग्रेज़ी में इसका शीर्षक House of Shadows (छायाओं का घर) दिया जाता है; कहानी में इस घर का नाम उन बड़े पेड़ों से पड़ा है जो इसे छाया में रखते हैं।
यह उपन्यास विक्रमसिंघे के अपने जन्मस्थान, दक्षिणी गाँव कोग्गल, के एक परिवार की कहानी लगभग 1920 से 1945 तक के वर्षों में कहता है, जिसके कुछ प्रसंग कोलंबो और कम्बुरुपिटिया में घटित होते हैं। इसके केंद्र में सिरिमल है, जो क़ानून पढ़ने के लिए गाँव छोड़कर कोलंबो जाता है और एक सफल वकील बनता है। उसके इर्द-गिर्द हैं उसके पिता तिनन मुदलाली, वह व्यवसायी जो यह घर बनवाता है; रतु हामिने, उसके पिता की निःसंतान विधिवत पत्नी; उसकी अपनी माँ, पोडि हामिने; और उसका भाई निमल, गाँव का एक दबंग जो स्थानीय राजनेता बन जाता है।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सिरिमल लौटता है तो कोग्गल को बदला हुआ पाता है: गाँव वालों की ज़मीनें युद्धकालीन हवाई अड्डे और उसकी हवाई पट्टी के लिए ले ली गई हैं। यह घर-वापसी पारिवारिक झगड़ों, कर्ज़ों और पीछे छोड़े गए लोगों के साथ तनावपूर्ण संबंधों को उजागर करती है, और पुस्तक अपराधबोध, अतीत-मोह, अनित्यता, अवसरवाद और वर्गों के बीच की खाई में डूबी है, जिन्हें प्रायः श्रीलंकाई समाज के प्रति लेखक की तीखी व्यंग्य-दृष्टि से देखा गया है।
निर्देशक सुदथ रोहन ने इस उपन्यास को Karuwala Gedara नाम से परदे पर उतारा।
यह उन पाठकों को रुचिकर लगेगा जो विक्रमसिंघे के ग्रामीण उपन्यास जानते हैं और कोग्गल तथा वहाँ के लोगों पर उनकी बाद की, अधिक निजी दृष्टि पढ़ना चाहते हैं।
- लेखक: Martin Wickramasinghe
- प्रकाशन वर्ष: 1963
- भाषा: सिंहली



