कार्ल मुलर अपने इस खूबसूरत, युद्ध-क्षत शहर के अर्ध-काल्पनिक चित्रण की शुरुआत यूरोपीय उपनिवेशवादियों द्वारा इस पर लड़ी गई महान लड़ाइयों के वर्णन से करते हैं.. सन् 1505 में, मार्ग से भटककर आया एक पुर्तगाली बेड़ा गाले में शरण लेने पहुँचा, स्थानीय राजाओं को अपदस्थ किया, कोलंबो को किलेबंद किया और वहीं बस जाने का निर्णय लिया. फिर डच आए, उन्होंने पुर्तगालियों को खदेड़ दिया, कोलंबो को अपनी राजधानी बनाया और तब तक शासन किया जब तक अंग्रेज़ नहीं आए और उन्हें बोरिया-बिस्तर समेटने पर मजबूर नहीं किया.
मुलर अतीत की इन कहानियों को आज कोलंबो में लड़ी जा रही लड़ाइयों के वर्णन के बीच पिरोते हैं—राजनीतिक लड़ाइयाँ जिनमें निहित स्वार्थों की प्रमुख भूमिका होती है, साथ ही जीवित रहने के संघर्ष में व्यक्तिगत स्तर पर लड़ी जाने वाली लड़ाइयाँ भी: कुछ अतिरिक्त पैसे कमाने के लिए वेश्यावृत्ति की ओर मुड़ती युवा महिलाएँ और बच्चे, गुज़र-बसर के लिए सड़कों पर भीख माँगते लोग, निराशा में अपराध की ओर मुड़ते बेरोज़गार युवक, अत्याचारों के विरुद्ध प्रदर्शन करते छात्र, और कुछ क्षणों के लिए ही सही अकेलेपन को दूर रखने के लिए रात्रि होने की आस लगाए प्रेमी-युगल.. मुलर की सुस्पष्ट शैली में लिखा गया, Colombo: A novel एक शहर की परीक्षाओं और विजयों का इतिहास है.
आपूर्तिकर्ता: Barefoot Bookshop, गाले रोड, कोलंबो.


