महमूद मट्टन 1952 के कार्डिफ़ के टाइगर बे का एक जाना-पहचाना चेहरा है, जो सोमाली और वेस्ट इंडियन नाविकों, माल्टीज़ व्यापारियों और यहूदी परिवारों की चहल-पहल से गुलज़ार रहता है। वह एक पिता है, एक मौक़ापरस्त है, कभी-कभार की छोटी-मोटी चोरी करने वाला भी। असल में वह बहुत कुछ है, लेकिन वह हत्यारा नहीं है। तो जब एक दुकानदार की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है और सबकी निगाहें उस पर टिक जाती हैं, तो महमूद को ज़्यादा फ़िक्र नहीं होती। यह सच है कि उसकी वेल्श पत्नी लॉरा के उसे छोड़ने के बाद से वह अक्सर मुसीबत में फँसने लगा है। लेकिन महमूद को अपनी बेगुनाही पर पूरा भरोसा है, उस देश में जहाँ, उसे लगता है, इंसाफ़ ज़रूर मिलता है। मुक़दमे से पहले के दिनों में ही, जब आज़ादी की उम्मीद धुँधली पड़ने लगती है, तब महमूद को एहसास होता है कि वह अपनी जान बचाने की एक भयावह लड़ाई में फँस चुका है - साज़िश, पूर्वाग्रह और राज्य की निर्ममता के ख़िलाफ़। और फाँसी के फंदे के साए में, वह यह समझने लगता है कि शायद सच्चाई भी उसे बचाने के लिए काफ़ी न हो।
हार्डबैक। पेंगुइन रैंडम हाउस।
बेयरफ़ुट बुकशॉप, गॉल रोड, कोलंबो द्वारा उपलब्ध कराया गया।


