Siddhalepa सीथोडका तेल एक पारंपरिक श्रीलंकाई आयुर्वेदिक फ़ॉर्मूले से बना हर्बल तेल है, जिसे सिंहल में सीथोडका थैलाया के नाम से जाना जाता है। इसमें अंकेंडा, हाथावारिया और एराबाडु को तिल के तेल और नारियल तेल के साथ मिलाया जाता है, और इसे रुई की मदद से त्वचा पर लगाया जाता है।
यह एक साफ़, गहरे अंबर-भूरे रंग का तेल है। दिखाई गई बोतल 30 मिली की एक छोटी, गोल पारदर्शी काँच की बोतल है जिस पर खाँचेदार सुनहरी धातु की स्क्रू-कैप लगी है। मैजेंटा रंग के लेबल पर तेल का नाम सिंहल, अंग्रेज़ी और तमिल में लिखा है, और निर्माता इसे अपनी आयुर तेल श्रृंखला में बेचता है।
सामग्री
- अंकेंडा (Acronychia pedunculata)
- हाथावारिया (Asparagus falcatus)
- एराबाडु (Erythrina variegata)
- तिल (Sesamum indicum)
- नारियल तेल (Cocos nucifera)
उपयोग विधि
- थोड़ी रुई को तेल में भिगोकर त्वचा पर लगाएँ।
- केवल बाहरी उपयोग के लिए।
जानने योग्य बातें
- पैक: स्क्रू-कैप वाली काँच की बोतल (दिखाई गई बोतल 30 मिली की है)
- श्रेणी: आयुर्वेदिक तेल
- निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और बैच नंबर लेबल पर अंकित हैं।
- केवल बाहरी उपयोग के लिए।
- केवल किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के निर्देशानुसार उपयोग करें; गर्भावस्था में या बच्चों के लिए उपयोग से पहले चिकित्सक से सलाह लें।
रत्मलाना स्थित हेट्टिगोडा इंडस्ट्रीज़ (प्राइवेट) लिमिटेड द्वारा श्रीलंका में निर्मित, जो सिद्धालेपा समूह का निर्माता है। सिद्धालेपा की शुरुआत 1934 में आयुर डॉ. हेंड्रिक डी सिल्वा हेट्टिगोडा के हर्बल बाम से हुई थी।


